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टैरो कार्ड

यद्यपि टैरो कार्ड को आज अनेक लोग भविष्य जानने या आत्मचिंतन के साधन के रूप में प्रयोग करते हैं, तथापि इसका कोई वैज्ञानिक या खगोलीय आधार नहीं है। विस्तार से चर्चा इस लेख में………..

टैरो कार्ड

खेल से अंधविश्वास तक की यात्रा

आज के समय में जो भारतीय ज्योतिष आम जनता के बीच प्रचलित है, वह थोथा चकमत्कार, ठग विद्या, तथाकथित सिद्धि और अंधविश्वास का रूप ले चुका है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वर्तमान में जिस प्रकार से ज्योतिष का प्रयोग और प्रचार किया जा रहा है, वह वैज्ञानिक विवेक और तर्क की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। परंतु इसका यह अर्थ कदापि नहीं लगाया जाना चाहिए कि भारतीय ज्योतिष की मूल अवधारणा ही अंधविश्वास पर टिकी है।


वास्तव में, समय के साथ-साथ ज्योतिष में कई ऐसे अप्रामाणिक, अविज्ञानी, और मतवादी सिद्धांतों को जोड़ दिया गया है, जिनका न तो शास्त्रीय ग्रंथों में स्पष्ट आधार है, न ही उनका कोई व्यवस्थित तर्कसंगत विश्लेषण मौजूद है। इन तत्त्वों ने मूल ज्योतिष को भ्रमित और विकृत कर दिया है। इन्हीं में से एक है—टेरो कार्ड


टैरो, जिसे आरंभ में ‘ट्रियोनफी’ (Trionfi) और बाद में ‘टैरोची’ (Tarocchi) या ‘टैरोक्स’ के नाम से जाना गया, मूल रूप से ताश के पत्तों का एक विशेष पैकेट है। इसका प्रयोग यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों में 15वीं शताब्दी के मध्य से एक खेल के रूप में किया जाता रहा है। हालांकि यह कार्ड पहली बार 14वीं शताब्दी के अंत में यूरोप में दिखाई दिए, लेकिन इनकी सटीक उत्पत्ति अज्ञात है। टैरो कार्ड का सबसे पुराना उल्लेख 1367 ईस्वी में स्विट्जरलैंड के ‘बर्न’ शहर में मिलता है, और ऐसा प्रतीत होता है कि इसके बाद ये पत्ते तेजी से पूरे यूरोप में फैल गए।


कुुछ स्रोतों के अनुसार प्रारंभिक टैरो कार्ड का निर्माण 15वीं शताब्दी में इटली में हुआ था। उस समय इन्हें केवल खेलने के लिए बनाया गया था, न कि भविष्य बताने के लिए। टैरो में कुल 78 कार्ड होते हैं, जिनमें कुछ कार्ड विशिष्ट छवियों और प्रतीकों से युक्त होते हैं। इन प्रतीकों का आध्यात्मिक या रहस्यमय अर्थ प्रारंभ में नहीं था, बल्कि यह एक सामान्य सामाजिक खेल का हिस्सा मात्र थे।


18वीं शताब्दी के अंत में, फ्रांस के कुछ तांत्रिक और रहस्यवादी विचारधारा वाले समूहों ने टैरो कार्ड के साथ भविष्यवाणी और आध्यात्मिक ज्ञान को जोड़ना शुरू किया। उन्होंने टैरो को गूढ़ ज्ञान (occultism) से जोड़कर यह दावा किया कि टैरो कार्ड न केवल ब्रह्मांड की ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि यह मानव आत्मा की गहराइयों तक पहुँचने का एक साधन भी हैं।


इन कार्डों की विशेष स्थिति, पैटर्न और छवियों की व्याख्या करके यह कहा जाने लगा कि उनसे मनुष्य के भविष्य, वर्तमान और आंतरिक मनोदशा के बारे में जानकारी मिल सकती है। यही वह कालखंड था जब “टैरो कार्ड रीडिंग” नामक प्रथा ने जन्म लिया।


आज टैरो कार्ड को सैकड़ों विभिन्न रूपों और डिजाइनों में प्रकाशित किया गया है। हर टैरो डेक (deck) अपने-अपने प्रतीक, पठन शैली, और अर्थों की व्याख्या में भिन्न हो सकता है। टैरो रीडिंग की प्रक्रिया में कार्डों को विशेष पैटर्न में फैलाया जाता है-जिसे spread कहा जाता है—और प्रत्येक स्थान का एक विशिष्ट प्रतीकात्मक अर्थ होता है।


यद्यपि टैरो कार्ड को आज अनेक लोग भविष्य जानने या आत्मचिंतन के साधन के रूप में प्रयोग करते हैं, तथापि इसका कोई वैज्ञानिक या खगोलीय आधार नहीं है। यह प्रणाली मुख्यतः मानवीय विश्वास, प्रतीकों की व्याख्या, और सुझावात्मक मनोविज्ञान (suggestive psychology) पर आधारित है। अतः इसे पूर्णतः अंधविश्वास या आत्म-प्रेरित मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया कहा जा सकता है।

 

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