Categories
जातक शास्त्र ज्योतिष प्रज्ञा

ज्योतिष और आधुनिक धारणा

आज का समाज “ज्योतिष“ से क्या समझता है? आजकल बहुत से लोग ज्योतिष को एक गूढ़ सिद्धि या चमत्कारी शक्ति मानते हैं, न कि एक शास्त्र या विज्ञान। ……………

आज का समाज “ज्योतिष“ से क्या समझता है?

आजकल बहुत से लोग ज्योतिष को एक गूढ़ सिद्धि या चमत्कारी शक्ति मानते हैं, न कि एक शास्त्र या विज्ञान। वे यह समझते हैं कि ज्योतिषी कोई अलौकिक ज्ञान रखता है, जिससे वह, मनुष्य के भाग्य में क्या लिखा है, पूरी तरह पढ़ सकता है और भविष्य में क्या घटेगा, यह बता सकता है। वह समझता है कि भगवान ने पैदा होते ही व्यक्ति के भाग्य में सब कुछ लिख दिया है-जैसे कितना पैसा होगा? कौन सी नौकरी करेगा? किस प्रकार का कार्य करेगा? आदि आदि। जो किस्मत में होगा वह होकर रहेगा। इस पर अपनी ओर से कुछ नहीं किया जा सकता। वे इसके वैज्ञानिक पक्ष या खगोलीय गणनाओं को कम, और चमत्कारिक पक्ष को अधिक महत्त्व देते हैं।

अधिकांश लोग ज्योतिष को कुंडली (जन्मपत्री) और दैनिक राशिफल के रूप में पहचानते हैं। अखबारों और टीवी पर आने वाले ‘आज का राशिफल’, विवाह के लिए गुण मिलान, नामकरण हेतु राशि देखकर अक्षर तय करना आदि। सर्वसाधारण ज्योतिष का प्रयोग शुभ समय (मुहूर्त) निकालने के लिए भी करता है।

ग्रहों को लेकर भ्रांत धारणाएँ

अनेक लोगों के मन में ज्योतिष के ग्रहों को लेकर भ्रांत कल्पनाएँ हैं। वे यह मानते हैं कि ज्योतिष के ग्रह-नक्षत्र आकाश में घूमते हुए खगोलीय पिंड नहीं हैं, बल्कि वे किसी जीवंत प्राणी या देवता की तरह होते हैं, जो खुश या नाराज़ हो सकते हैं और अपनी प्रसन्नता या कोप से मनुष्य को सुख या दुःख दे सकते हैं; अतः इन्हें प्रसन्न करना चाहिए—जैसे शनि महाराज को तेल चढ़ाना, सूर्य भगवान को अर्घ्य देना आदि।

ज्योतिषी से पूछे जाने वाले अवैज्ञानिक प्रश्न

इन्हीं भ्रांत धारणाओं के कारण लोग ज्योतिषियों से ऐसे प्रश्न पूछते हैं, जिनका ज्योतिष के विज्ञान और खगोलीय गणनाओं से कोई संबंध नहीं होता। उदाहरण के लिए— “पैसा आने के लिए कौन-सा उपाय करूँ” “क्या मैं परीक्षा में पास हो जाऊँगा?“ “नौकरी कब लगेगी?“ “लॉटरी कब लगेगी?“ “शत्रु कब नष्ट होंगे?“ इन प्रश्नों में लोग यह भूल जाते हैं कि ज्योतिष कोई जादुई शक्ति नहीं है जो किसी की भाग्य-रेखा बदल दे या उसे कृपा करके फल दिला दे।


जब साधारण व्यक्ति किसी सड़क के किनारे बैठे ज्योतिषी को देखता है, जो रत्न, अंगूठियाँ, ताबीज़ और धागे बेचते हुए राहगीरों को बुलाता है, तो उसके मन में ज्योतिष की महत्ता और गरिमा कम हो जाती है।

ज्योतिषी की स्थिति

आज का शिक्षित समाज ज्योतिषी को केवल मुहूर्त बताने, पूजा-पाठ कराने या शुद्ध धार्मिक अनुष्ठान करने वाला ही मानते हैं। आधुनिकतावादी समाज ज्योतिषियों को लाल-पीेले धोती-कुर्ता पहनने वाले या आडंबर पूर्ण वेश धारण करने वाले, माथे पर आड़ा-तिरछा तिलक लगाने वाले, अंगुठी बेचने वाले, रूढ़ीवादी विचारधारा वाले, पुरातन पंथी, टीवी चैनलों पर ढोंग रचने वाले तथा ठगने वाले ढोंगी के रूप में देखते हैं। हालांकि समाज का एक हिस्सा—खासकर ग्रामीण या धार्मिक पृष्ठभूमि वाले—अब भी ज्योतिषियों को वेद-पुराण के विद्वान, सिद्ध संत तथा अंतर्यामि के रूप में सम्मान देते हैं। परंतु बुद्धिजीवी व शिक्षित समाज उनको संदेह की नज़रों से ही देखता है।


संस्कृत पढ़े व्यक्ति को समाज में आदर इसलिए मिलता है कि वह परंपरा, संस्कृति और धर्म से जुड़ा माना जाता है। लोग उसे प्रणाम करते हैं, पैर छूते हैं, मंचों पर माला पहनाते हैं, और धार्मिक अवसरों पर प्रमुख स्थान देते हैं। परंतु जैसे ही बात आती है— विज्ञान सम्मेलन की, सामाजिक सुधार सम्मेलन की, समाज के नीति निर्माण की, शिक्षा प्रणाली के निर्धारण की, आधुनिक विज्ञान और तकनीकी विकास की, राजनैतिक या प्रशासनिक निर्णयों की—तो उसकी भूमिका समाप्त कर दी जाती है। उसके ज्ञान को प्रायः केवल कर्मकांड, पूजा-पाठ और श्लोक पाठ तक सीमित कर देखा जाता है।


टीवी चैनलों पर दिखाई देने वाले दिखावटी ज्योतिषियों ने शिक्षित वर्ग की नज़रों में ज्योतिषी को एक तरह का “टीवी बाबा“ या “ड्रामा कलाकार“ बना दिया है। हर चैनल पर ज्योतिष को चमत्कारिक, रहस्यमय या टोने-टोटके के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

ज्योतिष को लेकर उम्मीदें

सर्वसाधारण व्यक्ति ज्योतिष से तर्क, विवेक और कर्म की जगह डर, उम्मीद और चमत्कार की अपेक्षा रखता है। आम व्यक्ति अनिश्चित भविष्य से डरता है। उसका यह डर उसे लॉजिक या विज्ञान की जगह किस्मत और ग्रहों के सहारे की ओर खींचता है। सर्वसाधारण चाहता है कि बिना मेहनत के, कुछ रत्न पहन लेने से, कुछ दान कर देने से, जीवन बदल जाए। यह दृष्टिकोण अंधश्रद्धा को बढ़ाता है। जब व्यक्ति की अपेक्षाएँ अंधभक्ति में बदल जाती हैं, तो वह पाखंडी ज्योतिषियों के हाथों शोषण का शिकार बनता है। यहीं से ज्योतिष पाखंड और अंधविश्वास बनता है।


वहीं दूसरी ओर आज के युवा जो अच्छे पढ़े-लिखे हों, की ज्योतिष के प्रति उम्मीदें भी कोई खास तार्किक या वैज्ञानिक नहीं होती। वे भी ज्योतिषी से 100 रुपये में कायापलट चाहते हैं। 100 रुपये में जीवन की सभी उलझनें सुलझ जाएँ, एक रत्न पहनते ही नौकरी लग जाए, एक पूजा से विवाह हो जाए, और एक टोटका करते ही इंटरव्यू में निकलने की गारंटी मिल जाए। वे ज्योतिष को किसी जादू से कम नहीं समझते।


वहीं कुछ शिक्षित युवा ज्योतिष पढ़ने वाले युवाओं को अपने समूह में शामिल भी नहीं करते।

इंटरनेट पर ज्योतिष किस रूप में प्रचलित है

आज के डिज़िटल युग में ज्योतिष अपनी पारंपरिक सीमाओं को पार कर इंटरनेट, mobile apps और social media के माध्यम से आम जनमानस तक पहुँच बना चुका है। लाखों लोग हर सुबह विभिन्न websites और apps पर अपना दैनिक राशिफल देखते हैं; जन्मतिथि, समय और स्थान भरते ही मिनटों में online कुंडली और गुण मिलान प्राप्त हो जाता है। youtube और instagram जैसे platforms पर ज्योतिषी साप्ताहिक राशिफल, शनि की साढ़ेसाती, या लाभकारी योग जैसे विषयों पर वीडियो बनाकर लाखों views पाते हैं।
अब लोग ऑनलाइन भुगतान कर वीडियो कॉल या चैट के माध्यम से ज्योतिष परामर्श भी लेने लगे हैं।
इसका कारण है-
1. सुविधा—घर बैठे, 24×7 ज्योतिष सेवाएँ।
2. गोपनीयता—व्यक्ति निजी बात खुलकर पूछ पाता है।
3. विकल्पों की भरमार— ग्राहक अपनी पसंद से किसी भी ज्योतिषी का चयन कर सकता है।
4. सस्ता और जल्दी—कई वेबसाइट फ्री रिपोर्ट देती हैं, और पैड सेवाएँ भी तेज़ हैं।
5. मनोवैज्ञानिक संबल— विशेषकर संकट में, लोग इंटरनेट पर ‘कोई उपाय’ खोजते हैं।

लेकिन—

इस सुलभता से YouTube, instagram और websites पर हर दूसरा व्यक्ति ‘ज्योतिषाचार्य बनकर सामने आ रहा है और अशास्त्रीय, अप्रमाणिक तथा बेसिर-पैर की बातों से लोकप्रियता हासिल कर रहा है।
असंख्य वेबसाइट्स, ऐप्स और यूट्यूब चैनलों पर अप्रामाणिक, अशास्त्रीय और सतही जानकारी परोसी जा रही है, जहाँ ‘राशिफल’ एक महत्त्वपूर्ण हथियार होता है। अज्ञानी या व्यावसायिक लोग बिना किसी शास्त्राध्ययन के “एक क्लिक में भविष्य बताने” जैसे दावे कर रहे हैं, जिससे लोगों में भ्रम, अंधविश्वास और आर्थिक शोषण की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। साथ ही, स्वचालित कुंडली निर्माण टूल्स व AI निर्मित सुझाव बहुत भ्रामक होते है, जो विवाहित जीवन, स्वास्थ्य या करियर जैसे गंभीर निर्णयों को गलत दिशा में ले जा सकते हैं, अतः ज्योतिष से विश्वास टूटने का सबसे बड़ा कारण यही है।


आज प्ले-स्टोर पर हज़ारों ज्योतिष ऐप्स हैं जो 10 रुपए से लेकर 500 रुपए तक में “सटीक“ भविष्य बताने का दावा करते हैं। ।AI आधारित नकली कुंडलियाँ, बॉट से generated सुझाव, और copy-paste सुनी-सुनाई बेसिरपैर की बातों की भरमार से ज्योतिष बाज़ारू उत्पाद बनकर रह गया है।

“चमत्कार, सिद्धि, ठगविद्या, ढोंग और न जाने कितने रूप। व्यवसाय, लोकप्रियता, लाइक्स और व्यूज़ की होड़ में षास्त्र के स्थान पर बाज़ारू मनोरंजन“- यही आज का ज्योतिष है।”

अधिक ज्ञानवर्द्धन के लिए पुस्तक खरीदें—

“ज्योतिष विमर्श-भ्रम और सत्य”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!