परंपरागत भारतीय ज्योतिष में केवल जन्मकुंडली ही नहीं, बल्कि सामुद्रिक शास्त्र, प्रश्न ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, स्वप्न-विचार, शकुन-विज्ञान आदि अनेक शाखाएँ विकसित हुईं। इन सभी का उद्देश्य एक ही था—व्यक्ति और परिस्थिति को अधिकतम सटीकता के साथ समझना। यदि इन विद्याओं का समग्र और संतुलित प्रयोग किया जाए, तो किसी व्यक्ति के भविष्य, स्वभाव और जीवन-पथ के विश्लेषण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
Category: ज्योतिष प्रज्ञा
अंक ज्योतिष
अंक-ज्योतिष, जिसे आज न्यूमरोलॉजी कहा जाता है, भारतीय ज्योतिष या शास्त्रीय परंपरा से नहीं, बल्कि आधुनिक काल में विकसित एक विश्वास-आधारित पद्धति है। यहाँ विस्तार से पढ़ें…………..
‘कालसर्प योग’
भारतीय ज्योतिष में ‘कालसर्प योग’ एक अत्यंत चर्चित, किंतु विवादास्पद विषय है। आधुनिक समय में यह योग जनमानस में भय और जिज्ञासा का विषय बन गया है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या कालसर्प योग की अवधारणा प्राचीन शास्त्रीय ज्योतिष में मिलती है, या यह एक आधुनिक मनगणंत रचना है। प्रमुख ज्योतिष ग्रंथ जैसे-बृहत्पाराशर होराशास्त्र, […]
“क्या गुरुत्वाकर्षण की खोज न्यूटन से पहले भास्कराचार्य ने कर ली थी?” यह प्रश्न भावनात्मक गौरव या सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि इतिहास, विज्ञान और ज्ञान-पद्धति का है। यदि इसे पूर्वाग्रह, अतिरंजना या आत्मरक्षा की भावना से देखा जाएगा, तो न तो भास्कराचार्य के वास्तविक योगदान के साथ न्याय होगा और न ही न्यूटन के […]
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र बृहत् पाराशर होरा शास्त्र वैदिक ज्योतिष का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक ग्रंथ माना जाता है, विशेष रूप से जन्मकुण्डली के फलित (होरा शाखा) के लिए। इसे न केवल ज्योतिष के नियमों का संग्रह, बल्कि इस विधा का मूल स्रोत और एक विशाल विश्वकोश (Encyclopedia) माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र पढ़ने वाले अधिकांश […]
टैरो कार्ड
यद्यपि टैरो कार्ड को आज अनेक लोग भविष्य जानने या आत्मचिंतन के साधन के रूप में प्रयोग करते हैं, तथापि इसका कोई वैज्ञानिक या खगोलीय आधार नहीं है। विस्तार से चर्चा इस लेख में………..
फेंग शुई
फेंग शुई: ऊर्जा संतुलन या सांस्कृतिक अंधविश्वास आजकल फेंगशुई को भारतीय वास्तुशास्त्र के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया जाने लगा है, जिसके कारण आम लोगों में भ्रम बढ़ रहा है। यह मिश्रण न केवल मूल ज्ञान को धुंधला करता है, बल्कि भारतीय विद्या-परंपरा को भी विकृत करने का कारण बनता है। फेंगशुई मूलतः मान्यताओं और प्रतीकात्मक […]
अतीत के बीज, भविष्य के वृक्ष ओशो का यह वक्तव्य ज्योतिष, समय की अनिश्चितता, और अतीत के गहरे संस्कारों (टाइम ट्रैक) के संबंध में एक गहन और मनन योग्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वे पारंपरिक ज्योतिष की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए मनुष्य के अस्तित्व के अदृश्य और गहरे आयामों की पड़ताल करते हैं। “भविष्य […]
यह लेख आचार्य रजनीश ‘ओशो’ के प्रवचन “ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान” पर आधारित है, जिसमें उन्होंने ज्योतिष को केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि मनुष्य और ब्रह्मांड की अद्वैत लय का गहन विज्ञान बताया है। इस लेख में उनके विचारों की समीक्षा की गई है, जिसमें ज्योतिष को ब्रह्मांड और व्यक्ति की एकत्वपूर्ण लय के रूप में समझने की उनकी दृष्टि का विश्लेषण किया गया है।
वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में, विभिन्न माध्यमों से प्रसारित होने वाले राशिफल (Sun Sign/Zodiac Sign Predictions) पर विश्वास करना और उन्हें भविष्य जानने का आधार बनाना कदापि बुद्धिमानी नहीं है। यह परंपरा
