आज आयुर्वेद की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते हैं। अक्सर कहा जाता है कि आयुर्वेद काम नहीं करता, कि वैद्य भरोसेमंद नहीं रहे, कि गंभीर रोगों में अंततः एलोपैथी की शरण लेनी ही पड़ती है। अनेक रोगी आयुर्वेदिक उपचार से निराश होकर आधुनिक चिकित्सा की ओर चले जाते हैं और फिर उसी अनुभव को आयुर्वेद […]
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संस्कृत को जन-भाषा बनाने की भूल
संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने की अवधारणा कितनी सही है? क्या इससे संस्कृत को कुछ लाभ हो सकता है? इतिहास क्या कहता है? विस्तार से इस लेख में…………
संस्कृत के नाम पर
संस्कृत के प्रति उदासीनता आज शिक्षा और समाज में एक जुमला बहुत सहजता से उछाल दिया जाता है कि छात्रों, अभिभावकों या समाज की संस्कृत में रुचि नहीं होती या वे उसे उपेक्षा की नज़र से देखते हैं, कि आखिर क्या करेेंगे संस्कृत पढकर? यह वाक्य अब इतना प्रचलित हो चुका है कि इसे सत्य […]
परा-पूजा स्तोत्र
परा पूजा स्तोत्र उन लोगों के लिए है जो पूजा की गहराई को समझना चाहते हैं। यह बताता है कि असली पूजा ईश्वर को बाहरी वस्तुओं से रिझाना नहीं, बल्कि अपनी आत्मा में उस परम तत्व को महसूस करना है। यहाँ मूल स्तोत्र हिंदी अनुवाद के साथ दिया जा रहा है……..
संस्कृत—क्यों यह मात्र भाषा नहीं
क्यों यह मात्र भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है? संस्कृत मात्र एक भाषा नहीं है; यह भारतीय सभ्यता की आत्मा, ज्ञान की कुंजी और विश्व की सबसे वैज्ञानिक संपदा है। यह वह शाश्वत वाणी है जिसने न केवल भारतीय उपमहाद्वीप के दर्शन, धर्म और साहित्य को जन्म दिया, बल्कि हिंदी, मराठी, बंगाली सहित […]
