फेंग शुई: ऊर्जा संतुलन या सांस्कृतिक अंधविश्वास आजकल फेंगशुई को भारतीय वास्तुशास्त्र के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया जाने लगा है, जिसके कारण आम लोगों में भ्रम बढ़ रहा है। यह मिश्रण न केवल मूल ज्ञान को धुंधला करता है, बल्कि भारतीय विद्या-परंपरा को भी विकृत करने का कारण बनता है। फेंगशुई मूलतः मान्यताओं और प्रतीकात्मक […]
Author: प्रमोद गौड़
संस्कृत—क्यों यह मात्र भाषा नहीं
क्यों यह मात्र भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है? संस्कृत मात्र एक भाषा नहीं है; यह भारतीय सभ्यता की आत्मा, ज्ञान की कुंजी और विश्व की सबसे वैज्ञानिक संपदा है। यह वह शाश्वत वाणी है जिसने न केवल भारतीय उपमहाद्वीप के दर्शन, धर्म और साहित्य को जन्म दिया, बल्कि हिंदी, मराठी, बंगाली सहित […]
अतीत के बीज, भविष्य के वृक्ष ओशो का यह वक्तव्य ज्योतिष, समय की अनिश्चितता, और अतीत के गहरे संस्कारों (टाइम ट्रैक) के संबंध में एक गहन और मनन योग्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वे पारंपरिक ज्योतिष की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए मनुष्य के अस्तित्व के अदृश्य और गहरे आयामों की पड़ताल करते हैं। “भविष्य […]
यह लेख आचार्य रजनीश ‘ओशो’ के प्रवचन “ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान” पर आधारित है, जिसमें उन्होंने ज्योतिष को केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि मनुष्य और ब्रह्मांड की अद्वैत लय का गहन विज्ञान बताया है। इस लेख में उनके विचारों की समीक्षा की गई है, जिसमें ज्योतिष को ब्रह्मांड और व्यक्ति की एकत्वपूर्ण लय के रूप में समझने की उनकी दृष्टि का विश्लेषण किया गया है।
वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में, विभिन्न माध्यमों से प्रसारित होने वाले राशिफल (Sun Sign/Zodiac Sign Predictions) पर विश्वास करना और उन्हें भविष्य जानने का आधार बनाना कदापि बुद्धिमानी नहीं है। यह परंपरा
ज्योतिष और आधुनिक धारणा
आज का समाज “ज्योतिष“ से क्या समझता है? आजकल बहुत से लोग ज्योतिष को एक गूढ़ सिद्धि या चमत्कारी शक्ति मानते हैं, न कि एक शास्त्र या विज्ञान। ……………
ज्योतिष-एक-ऐतिहासिक-गरिम
ज्योतिष-एक ऐतिहासिक गरिमा चाहे ज्योतिष की भविष्यवाणियाँ आज सही ठहरती हों या नहीं, और चाहे ज्योतिष आज असफलता की सबसे बड़ी चोटी पर खड़ा हो, इन सभी बातों को यदि दरकिनार कर दें तो भी एक ऐतिहासिक सत्य यह भी है कि ज्योतिष सदियों तक खगोलशास्त्र, गणित, कालगणना और प्राच्य ज्ञान परंपरा के साथ सहजता […]
हस्तरेखा शास्त्र
हस्त रेखा के प्रचलित सिद्धांत हस्तरेखा के जो सिद्धांत आजकल प्रचलित है वह न तो हस्तरेखा के मूल सिद्धांत है और न ही भारतीय सामुद्रिक शास्त्र से संबंध रखते हैं । आइए तथ्यों और प्रमाणों के साथ आरंभ करते हैं । आधुनिक हस्त रेखाओं के सिद्धांतों का प्रतिपादन करने वाले आयरलैंड में जन्मे कीरो (CHEIRO) […]
