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अन्य लेख संस्कृत में विज्ञान

आयुर्वेद का विकृतिकरण

आज आयुर्वेद की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते हैं। अक्सर कहा जाता है कि आयुर्वेद काम नहीं करता, कि वैद्य भरोसेमंद नहीं रहे, कि गंभीर रोगों में अंततः एलोपैथी की शरण लेनी ही पड़ती है। अनेक रोगी आयुर्वेदिक उपचार से निराश होकर आधुनिक चिकित्सा की ओर चले जाते हैं और फिर उसी अनुभव को आयुर्वेद […]

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अन्य लेख संस्कृत भाषा

संस्कृत को जन-भाषा बनाने की भूल

संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने की अवधारणा कितनी सही है? क्या इससे संस्कृत को कुछ लाभ हो सकता है? इतिहास क्या कहता है? विस्तार से इस लेख में…………

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अन्य लेख संस्कृत भाषा

संस्कृत के नाम पर

संस्कृत के प्रति उदासीनता आज शिक्षा और समाज में एक जुमला बहुत सहजता से उछाल दिया जाता है कि छात्रों, अभिभावकों या समाज की संस्कृत में रुचि नहीं होती या वे उसे उपेक्षा की नज़र से देखते हैं, कि आखिर क्या करेेंगे संस्कृत पढकर? यह वाक्य अब इतना प्रचलित हो चुका है कि इसे सत्य […]

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ज्योतिष प्रज्ञा

ज्योतिष : संकुचित गणना से समग्र बोध की ओर

परंपरागत भारतीय ज्योतिष में केवल जन्मकुंडली ही नहीं, बल्कि सामुद्रिक शास्त्र, प्रश्न ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, स्वप्न-विचार, शकुन-विज्ञान आदि अनेक शाखाएँ विकसित हुईं। इन सभी का उद्देश्य एक ही था—व्यक्ति और परिस्थिति को अधिकतम सटीकता के साथ समझना। यदि इन विद्याओं का समग्र और संतुलित प्रयोग किया जाए, तो किसी व्यक्ति के भविष्य, स्वभाव और जीवन-पथ के विश्लेषण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

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